भीषण अग्निकांड में इतिहास में दफन हुआ नैनीताल का Old London House, इसलिए था खास_我的网站
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),代表其在平台内的综合表现越好。 किशोर जोशी, नैनीताल। सरोवर नगरी की खोज के बाद अंग्रेजी राज में ऐतिहासिक भवनों सहित अन्य निर्माण किए गए। 1840 में हैनरी रैमजे की सहायक आयुक्त कुमाऊं के रूप में प्रथम नियुक्ति के बाद प्रशासनिक रूप से नैनीताल को बसाने की तैयारी करने के साथ ही मल्लीताल में बाजार, चर्च तथा सरकारी भवनों के निर्माण के लिए स्थान निर्धारित किए गए।,उसी साल दिसंबर में अंग्रेज पी बैरन तथा तत्कालीन कमिश्नर लशिंगटन की ओर से भी अपने लिए भवन का निर्माण किया गया। जबकि 1843 में मेजर एचएच अर्नाड की ओर से गिवालीखेत या शेरवुड कोठी का निर्माण किया गया। 1863 में अंग्रेजी दौर में ही मल्लीताल मोहन को चौराहा के निकट ओल्ड लंदन हाउस का निर्माण किया गया है।,अंग्रेजी हुकूमत में 1862 में नार्थ प्रोविन्स प्रांत की नैनीताल राजधानी बनाई तो इसी भवन की दूसरी मंजिलों में अंडर सेक्रेट्री स्तर के सेक्शन आफिसर रहते थे, जबकि इसके नीचे लिपिक तथा उसके नीचे बाजार की ओर चतुर्थ श्रेणी कर्मी-नौकर चाकर निवास करते थे। राजधानी का सचिवालय तब अग्निकांड में इस चार मंजिला भवन के खाक होने के बाद शहर की एक ब्रिटिशकालीन विरासत इतिहास में दफन हो गई।,अग्निकांड में इतिहासकार प्रो. अजय रावत की बुजुर्ग बहन जिंदा जल गई। ओल्ड लंदन हाउस में प्रो अजय रावत की बड़ी बहन शांता देवी व दूसरी बहन स्वर्णलता के अलावा तीन अन्य परिवारों के भी आवास हैं। चार मंजिला यह भवन गौथिक व ब्रिटिश कंट्री साइड शैली में निर्मित था। जर्जर होने की वजह से आजकल भवन की ऊपरी मंजिलों की मरम्मत की जा रही थी।,इतिहासकार प्रो. रावत के अनुसार 1947 में देश आजाद होने के बाद यह भवन तल्लीताल निवासी सुंदर लाल साह के पास आ गया था। प्रो रावत की पूर्व प्रधानाचार्य बहिन स्वर्णलता ने साह से 1970 में यह खरीदा था। लकड़ी व पत्थर निर्मित इस भवन को खास अंदाज में बनाया गया था।,आजादी के बाद इस भवन के निचले तल में दुकानों का निर्माण किया गया। भवन में पहला फ्लैट प्रो. रावत की बड़ी बहन पूर्व प्रधानाचार्य स्वर्णलता रावत का था। कोविड काल में 2020 में निधन से पहले उन्होंने अपना हिस्सा बहन शांता बिष्ट के नाम कर दिया। जो मुंबई से रहने के लिए बेटे निखिल के साथ यहां आ गई।,
पहले लंदन हाउस था नाम
नैनीताल: अग्निकांड की चपेट में आए ओल्ड लंदन हाउस भवन पहले लंदन हाउस के नाम से जाना जाता था। निर्माण के 50 साल अधिक होने के बाद 20 वीं शताब्दी में ओल्ड लंदन हाउस नाम प्रचलित हो गया।,प्रो. रावत के अनुसार 1857 की क्रांति के समय अंग्रेज पर्यटकों सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने नैनीताल में शरण ली थी, रुहेलखंड के कमिश्नर ने तो यहां तब डेढ़ साल तक शरण ली थी। इसके बाद ही 1862 में अग्रेजों ने नैनीताल को राजधानी बनाया और सचिवालय सहित अन्य निर्माण किए जबकि 1863 में इस भवन का निर्माण किया गया।,
यह है गौथिक शैली
वास्तुकला और कला की इस शैली की शुरुआत 12 वीं शताब्दी में फ्रांस में हुई थी, यह शैली 16 वीं शताब्दी तक प्रचलित रही। इस शैली में ऊंचे और नुकीले शिखर बनाए जाते हैं। दरवाजों व खिड़कियों के ऊपर नुकीले मेहराब बनाए जाते हैं। छतों पर जाली जैसी संरचना होती है।,दीवारों को सहारा देने के लिए स्तंभ बनाए जाते हैं। खिड़कियों में धार्मिक दृश्य उकेरे जाते थे, जिससे रोशनी और आध्यात्मिकता का वातावरण बनता है। इस शैली ऊंचाई, रोशनी, धार्मिक प्रतीकवाद व अद्धभुत कलात्मक नक्काशी देखने को मिलती है।。
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